झांसी जिले के मऊरानीपुर में बिना डिग्री और बिना रजिस्ट्रेशन के कथित हड्डी जोड़ केंद्र पर प्रशासन ने छापेमारी कर कमरे को सील कर देने की बात कही। लेकिन इस कार्रवाई के बाद बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रशासन की नजर सिर्फ एक क्लिनिक तक ही सीमित है, या सत्ता के चूर मठाधशो का या फिर पूरे क्षेत्र में चल रहे अवैध स्वास्थ्य कारोबार पर भी शिकंजा कसा जाएगा?
मऊरानीपुर के नेहरू नगर में उपजिलाधिकारी श्वेता साहू और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने बिना डिग्री और बिना रजिस्ट्रेशन के कथित रूप से संचालित हड्डी जोड़ केंद्र पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान भाजपा नेता आयुष श्रीवास नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि आयुष श्रीवास के दादा डॉ मुन्ना लाल श्रीवास की बहु मऊरानीपुर वर्तमान चेयरमैन श्रीमती शशि श्रीवास की जेठानी पूनम श्रीवास के किराएदार के कमरे से हड्डी जोड़ने में इस्तेमाल होने वाले अवैध उपकरण बरामद हुए। हालांकि मौके पर कोई संचालक नहीं मिला, जिसके बाद प्रशासन ने कमरे को सील करने की बात कहते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी।
लेकिन इस कार्रवाई ने कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। अगर यह केंद्र लंबे समय से संचालित हो रहा था, तो जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक अब तक क्यों नहीं लगी? क्या कार्रवाई सिर्फ शिकायत मिलने के बाद ही होगी, या अवैध क्लिनिकों की नियमित जांच भी की जाएगी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि मऊरानीपुर में सरकारी स्वास्थ्य केंद्र के आसपास बिना रजिस्ट्रेशन मेडिकल स्टोर, पैथोलॉजी लैब और अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित होने की शिकायतें भी लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन पर भी समान सख्ती दिखाएगा, या कार्रवाई सिर्फ एक कमरे तक ही सीमित रहेगी?
अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन इस कार्रवाई को अभियान का रूप देता है या फिर यह सिर्फ एक दिन की कार्रवाई बनकर रह जाती है।
उपजिलाधिकारी श्वेता साहू ने बताया कि
“सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ मौके पर छापेमारी की गई। जांच के दौरान बिना अनुमति हड्डी जोड़ने से संबंधित उपकरण मिले हैं। मौके पर कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। कमरे को सील कर दिया गया है। मामले की जांच कर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।”


