मोंठ (झांसी)। अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता स्वर्गीय चित्रस्वरूप श्रीवास्तव की पुण्य स्मृति में उनके जन्मदिवस के अवसर पर रविवार 12 अप्रैल को अधिवक्ता भवन मोंठ में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम “काव्यांजलि” का आयोजन किया जाएगा।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कार्यक्रम संयोजक मिलिंद श्रीवास्तव एडवोकेट ने बताया कि इस विशेष आयोजन में बुंदेली और खड़ी बोली के रचनाकार अपनी रचनाओं के माध्यम से अधिवक्ताओं के आदर्श स्व. चित्रस्वरूप श्रीवास्तव को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। काव्यांजलि में क्षेत्र के कई कवि एवं साहित्यकार अपनी काव्य प्रस्तुति देंगे, जिससे कार्यक्रम का वातावरण साहित्यिक एवं सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहेगा।
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में कविता पाठ के साथ-साथ लोक संगीत के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे बुंदेलखंड की सांस्कृतिक परंपराओं को भी मंच मिलेगा।
इसके अलावा इस वर्ष काव्यांजलि कार्यक्रम में पहली बार समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित करने की पहल की गई है। इसके अंतर्गत वकालत के क्षेत्र में ‘वरिष्ठ अधिवक्ता सम्मान’, संगीत के क्षेत्र में ‘सुर तरंग सम्मान’, शिक्षा के क्षेत्र में ‘शिक्षाविद सम्मान’, इतिहास के क्षेत्र में ‘युवा शोधार्थी सम्मान’ तथा साहित्य के क्षेत्र में ‘बुंदेली कलम सम्मान’ प्रदान किए जाएंगे।
आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं और क्षेत्र के साहित्यकारों, अधिवक्ताओं एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में यह आयोजन गरिमामय रूप से संपन्न होगा।
अंगदान व देहदान का संकल्प लेकर शिक्षक दंपति बने मानवता की ।मिसाल

मोंठ (झांसी)। समाज में मानवता, सेवा और परोपकार का संदेश देने वाले उदाहरण कम ही देखने को मिलते हैं, लेकिन कुछ लोग अपने संकल्प और कार्यों से समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन जाते हैं। ऐसा ही प्रेरणादायक उदाहरण जनपद जालौन के कोंच नगर के मूल निवासी लोकेंद्र प्रताप सिंह और उनकी पत्नी डॉ. पिंकी सिंह ने प्रस्तुत किया है।
लोकेंद्र प्रताप सिंह वर्तमान में जनपद सिद्धार्थनगर के खरदेवरी विद्यालय, ब्लॉक खुनियांव में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी पत्नी डॉ. पिंकी सिंह झांसी के डॉ. राम मनोहर लोहिया महिला पीजी कॉलेज, गुरसराय में प्राचार्य के पद पर सेवाएं दे रही हैं।
शिक्षक दंपति ने मानवता की सेवा के लिए अंगदान और देहदान का संकल्प लेकर समाज के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO), जो भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्यरत संस्था है, के माध्यम से जारी प्रमाणपत्र के अनुसार दंपति ने अपने लिवर, हृदय, किडनी, फेफड़े सहित अन्य अंगों और कॉर्निया को दान करने की स्वीकृति प्रदान की है।
उनका यह निर्णय न केवल जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनदायी साबित हो सकता है, बल्कि समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके साथ ही देहदान का संकल्प चिकित्सा शिक्षा और शोध कार्यों के लिए भी अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते किसी व्यक्ति के अंगों का सफल प्रत्यारोपण हो जाए, तो एक व्यक्ति कई लोगों को नया जीवन दे सकता है। ऐसे निर्णय समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने और लोगों को जागरूक करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
शिक्षक दंपति की यह सराहनीय पहल समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है। इससे लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और उम्मीद है कि अन्य लोग भी इस पुण्य कार्य में आगे आकर मानवता की सेवा का संदेश देंगे।


