ब्राह्मण समाज झांसी ने फिल्म के शीर्षक को बताया सामूहिक मानहानि व संवैधानिक मर्यादाओं के विरुद
ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर प्रस्तावित फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के शीर्षक एवं कथानक को लेकर ब्राह्मण समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है। ब्राह्मण समाज, झांसी ने इस संबंध में भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को ज्ञापन जिलाधिकारी झांसी के माध्यम से संयोजक डा जितेन्द्र कुमार तिवारी के संयोजन में एवं आचार्य पं हरिओम पाठक के मुख्य आतिथ्य में,प्रेषित कर फिल्म के डिजिटल प्रसारण पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध तथा संबंधित ओटीटी प्लेटफॉर्म के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि फिल्म का शीर्षक एवं प्रचारित कथानक प्रथम दृष्टया ही किसी विशिष्ट सामाजिक वर्ग को सामूहिक रूप से भ्रष्ट एवं अनैतिक दर्शाने का प्रयास करता है, जो न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों, सामाजिक सौहार्द और विधिक मर्यादाओं के प्रतिकूल भी है। यह भी उल्लेख किया गया है कि फिल्म का ट्रेलर सार्वजनिक होने के बाद समाज में व्यापक असंतोष एवं रोष की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
ब्राह्मण समाज झांसी के मुख्य संयोजक डा जितेन्द्र कुमार तिवारी ने कहा कि ‘पंडत’ जैसे सम्मानसूचक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक गरिमा से जुड़े शब्द के साथ ‘घूसखोर’ जैसे आपराधिक विशेषण का प्रयोग, संपूर्ण ब्राह्मण समाज की सामूहिक मानहानि की श्रेणी में आता है, जो भारतीय दंड संहिता एवं स्थापित न्यायिक दृष्टांतों के अनुसार दंडनीय कृत्य है। ज्ञापन में यह भी रेखांकित किया गया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता निरंकुश नहीं है और संविधान के अनुच्छेद 19(2) के अंतर्गत लोक व्यवस्था, नैतिकता एवं सामाजिक शांति की रक्षा हेतु युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 के अंतर्गत भी ऐसे डिजिटल कंटेंट का प्रसारण निषिद्ध है, जो किसी समुदाय की धार्मिक एवं सामाजिक भावनाओं को आहत करता हो।
मुख्य संरक्षक आचार्य पं हरिओम पाठक जी ने आशंका जताई कि इस प्रकार की सामग्री से सामाजिक विद्वेष, वैमनस्य एवं असंतोष उत्पन्न हो सकता है, जिससे लोक व्यवस्था प्रभावित होने का गंभीर खतरा बना रहता है।
ब्राह्मण समाज झांसी द्वारा प्रदत्त ज्ञापन में रेखांकित किया गया कि यह विषय केवल किसी एक समाज की भावनाओं का नहीं, बल्कि संविधान, सामाजिक संतुलन एवं राष्ट्रीय एकता से जुड़ा हुआ है। यदि इस प्रकार की फिल्मों को प्रसारित होने की अनुमति दी गई, तो भविष्य में अन्य समुदायों को भी इसी प्रकार लक्षित किया जा सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के डिजिटल प्रसारण पर संपूर्ण भारत में तत्काल रोक लगाई जाए, नेटफ्लिक्स के विरुद्ध आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जाए तथा भविष्य में किसी भी समाज को लक्षित कर बनाए जाने वाले आपत्तिजनक कंटेंट पर रोक हेतु स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ। ज्ञापन की प्रतिलिपि माननीय मुख्यमंत्री जी एवं सूचना प्रसारण मंत्री जी को भी प्रेषित की गई।


