
समथर झांसी: नगर के समथर पीपरी मार्ग पर स्थित आदिशक्ति मां जगदंबा श्री बीजासेन माता मंदिर प्रांगण में संत श्री श्री बालक दास जी महाराज के सानिध्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर धूमेश्वर धाम के कृपापात्र भागवतआचार्य ऋषभदेव महाराज ने कथा परीक्षित श्रीमती राजकुमारी गोविंदसिंह पाल से ठाकुर जी महाराज एवं श्रीमद्भागवत पुराण,व्यास गद्दी का वैदिक रीति रिवाज अनुसार पूजन कराया। कथा के तृतीय दिवस पर श्री जागेश्वर महाराज का कथा परीक्षित एवं आयोजक समिति द्वारा तिलक लगाकर माला पहनाकर चरण वंदन किया गया। भागवत आचार्य ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि राजा उत्तानपाद की दो रानियां थीं – सुरुचि और सुनीति। सुरुचि के पुत्र उत्तम और सुनीति के पुत्र ध्रुव थे। राजा सुरुचि को अधिक प्रेम करते थे। एक बार बालक ध्रुव ने पिता की गोद में बैठने की जिद की, लेकिन सुरुचि ने उसे रोक दिया।
ध्रुव ने रोते हुए अपनी मां सुनीति को ये बात बताई। मां ने उसे भगवान की शरण में जाने को कहा। पांच वर्षीय ध्रुव राज्य छोड़कर वन में तपस्या के लिए चले गए। रास्ते में नारदजी मिले और उन्होंने ध्रुव को समझाया, लेकिन ध्रुव ने परमपिता की गोद में बैठने की इच्छा व्यक्त की। उनकी कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें वरदान दिया।
भक्त प्रहलाद की कथा सुनाते हुए कहा कि यदि पिता कुमार्ग पर चले तो पुत्र का कर्तव्य है कि वो उसे सही मार्ग पर लाए। तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद प्रहलाद ने भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा। भगवान ने नरसिंह रूप में अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया और प्रहलाद को परमधाम पहुंचाया, ध्रुव एवं प्रहलाद की कथा सुनकर श्रोतागण भाव विभोर हो गए।कथा के उपरांत आरती कर भक्तजनों को प्रसाद वितरण किया गया। वही मंदिर प्रांगण में ध्वार की शीतला माता एवं रामगढ़ की माता मंदिर के लिए बोए गए १२१ ज्वारों में स्थानीय भजनगायकों द्वारा देर रात्रि तक भजन कार्यक्रम संपन्न हुआ।उक्त अवसर पर
संजय व्यास,पिंकू दांगी, रमाकांत तिवारी,शैली नगाइच,अंजनी खजांची,लाखन,भगवत,पिंकू बुधौलिया,अशोक शर्मा,गोविंद पाल,मोहित,अमित कुशवाहा, पंचम,राजीव,छबिराम , ज्ञानसिंह,मानवेंद्र सिंह ध्रुव गुर्जर सहित बहुत से श्रद्धालु उपस्थित रहे।


