गुरसरांय(झांसी)। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक का झांसी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत परखने के लिए 18 दिसंबर 2025 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरसरांय में आकर निरीक्षण किया था निरीक्षण में सफाई से लेकर यहां तैनात डॉक्टरों की कारगुजारिया उजागर होने पर वह बुरी तरह भड़क गये थे और झाँसी जिले के सीएमओ से लेकर गुरसरांय सीएससी प्रभारी डॉक्टर ओपी राठौर को जल्द से जल्द कमियाँ दूर करने के साथ लापरवाह डॉक्टर जिसकी अलमारी में एक्सपायरी डेट की मिली दवाइयों को लेकर जहाँ कार्यवाही के सख्त निर्देश दिए थे। उधर ऑक्सीजन सिलेंडर भी एक्सपायरी डेट के होने के साथ-साथ अस्पताल कैंपस व अस्पताल के अंदर भारी गंदगी के बारे में उन्होंने स्पष्ट तौर से प्रभारी चिकित्साधिकारी से सफ़ाई आदि व्यवस्था के लिए क्या धन नही है पूंछा था। जिस पर प्रभारी चिकित्साधिकारी ने धन पर्याप्त होना तो बताया था लेकिन कितना है इस बारे में भी वह स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके थे और डिप्टी सीएम के निरीक्षण हुए 18 दिन से अधिक समय गुजर गया है उल्टा असर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में देखा जा रहा है कि भारी गंदगी जहां तहाँ पड़ी हुई है। इस प्रकार लग रहा है झांसी जिले का स्वास्थ्य विभाग उत्तर प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों के विरुद्ध खुल्लम खुल्ला जन विरोधी नीति अपनाकर लग रहा है सरकार की ऊँची पगार लेने के बाद और भारी भरकम बजट होने के बाद भी कोई व्यवस्था नहीं बना रहे हैं। चर्चा है कि यहां सब गोलमाल है क्योंकि यहां कोई वित्तीय लिपिक तैनात नहीं है कई दशकों से तैनात एक स्वास्थ्य कर्मी डॉक्टरों से मिलकर सफाई आदि व्यवस्था काम के नाम पर फर्जीवाड़ा करते दिख रहा है। और इस कर्मी की जो तैनाती है वह काम सिर्फ और सिर्फ कागजों में दिखता है। शासन की गाइडलाइन का यहां पर खुला उल्लंघन देखा जा सकता है हालत तो यह है कि यहां पर सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन होते हुए भी सिर्फ जिस दिन डिप्टी सीएम निरीक्षण पर आये थे उसी दिन चली थी बकाया यहां पर इस मशीन को चलाने वाला महीनों से जिले के सीएमओ तैनात ही नहीं कर पाए हैं। यहां जनरेटर के नाम पर भी डीजल की फर्जी खानापूर्ति होती है और एक्सरा आदि मरीजों के उतरना होता है और लाईट न होने पर जनरेटर नही चलाया जाता हैं अधिकांश कह दिया जाता है जनरेटर खराब है और तेल के लिए मरम्मत के लिए ऊपर से पैसे नहीं आते हैं जबकि अल्ट्रासाउंड मशीन के उपयोग के लिए मरीजों को जिले से एक प्राइवेट अल्ट्रासाउंड लगाए व्यक्ति के पास मरीजो को भेजकर मोटी रकम मरीजों से ऐठी़ जाती है इस प्रकार लग रहा है कि सरकारी धन का फर्जीवाड़ा केंद्र गुरसरांय सरकारी अस्पताल बना हुआ है। तो डिप्टी सीएम स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक के जाने के बाद यहाँ के सीएमओ,प्रभारी चिकित्साधिकारी ने झाँसी जिले की सबसे दूरस्थ सीएचसी गुरसरांय को सेवा विस्तार की जगह और संकीर्णता स्वास्थ्य सेवाओं में लाने का काम चालू कर दिया है यहां तैनात योग्य काबिल डॉक्टर रजनीश कुमार को गुरसरांय से हटा दिया गया है और यहां पर डॉक्टर से लेकर सफ़ाई कर्मी की भी कोई तैनाती नही की गयी है। बताते चले जबसे स्वास्थ्य केंद्र गुरसरांय की स्थापना हुई थी तब से अब तक एक मात्र सफ़ाई कर्मी तैनात है अगर सीएमओ जिलाधिकारी अथवा शासन को लिखकर यहाँ अस्थाई सफाई कर्मी व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की तैनाती करते तो यह जिम्मेदारी भी सीएमओ अथवा विभाग के जिम्मेदार लोग निभाने में आनाकानी कर रहे हैं यह भी बता दें जब स्थापना हुई थी तब लगभग 50 मरीज अधिकतम इलाज को आता होगा और आज बदली हुई तस्वीर यह है कि यहां पर 500 से लेकर 700 आदमी इलाज को आता था लेकिन डिप्टी सीएम के निरीक्षण के बाद यहां की जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की शासन व जन विरोधी नीति के चलते यहाँ पर संख्या अब मरीजों की कम होने लगी है। क्योंकि यहाँ के जिम्मेदारान डॉक्टर मरीजों को बचाने की जगह अपनी लापरवाही,तानाशाही,धनकमाऊ नीति के चलते गुरसरांय सरकारी अस्पताल को रिफर सेंटर बना दिया है। नगर व क्षेत्र की जनता ने जिला प्रशासन से लेकर उत्तर प्रदेश शासन से स्वास्थ्य सेवाएं बिगाड़ने वालों के विरुद्ध कार्यवाही कर यहां पर तेज गति से स्वास्थ्य सेवाएं विस्तार कर आम जन को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की पहल की है।


