सार्थक नायक
गुरसरांय(झांसी)- नगर के बड़े हनुमान जी मंदिर पर चल रहे 10 हजार सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ के अवसर पर दूसरे दिन की कथा में बोलते हुए नैमिषारण्य के मनीषी देवेंद्र ने कहा कि सेवा भाव सीखना है तो हनुमान जी से सीखो हनुमान जी की प्रत्येक गतिविधि में विनम्रता सेवा तथा साहस छिपा हुआ है। सारी गतिविधि में हमें बहुत बड़ा संदेश मिलता है यदि यह संदेश हम अपने जीवन में आत्मसात कर ले तो हम वह कोई इच्छा नहीं जो पूरी न कर सके। सारी समस्याओं का हल हनुमान चालीसा है हनुमान चालीसा केवल एक चालीसा नहीं बल्कि यह सिद्ध मंत्र है जो इसको समझ जाता है और मन से करता है उसके पास क्लेश नहीं रहता है।उन्होंने जीभ के संयम पर बल दिया। जीभ सही रही तो सब ठीक हो जाएगा।बोलने चखने का काम जीभ करती है।यह दो काम करती है जबकि आँख,कान,नाक केवल एक ही काम करते है जो जीभ को संयम में रखता है।उसके जीवन से 80 प्रतिशत समस्याएं खत्म,बहुत जरूरी हो तभी बोले।हनुमान चालीसा शिव जी के वरदान से मन्त्र बन गया है।यह बहुत शक्तिशाली मन्त्र है।हनुमान चालीसा में पांच बार जय शव्द आया है।बानर कभी घर नही बनाता,सेवा ही साधना है।सेवा कैसे की जाती है यह हनुमान जी ने सिखाया है,सेवा कठिन साधना है।तपस्या का प्रभाव बहुत होता है।कल्याण चाहता है तो इसके प्रति अभिमती को त्याग दो।शरीर को कोई भर नही सकता है।सवेरे भरो शाम को खाली लेकिन इस विनाशी शरीर से अविनाशी परमात्मा का साक्षत्कार हो सकता है। वस्तु की ममता दुख देती बस्तु दुख नही देती।कथा में सतीश चौरसिया,रामनारायण पस्तोर,के.के.तिवारी,प्रशिद्ध नारायण यादव,रामबाबू शर्मा,चंद्र प्रकाश चौरसिया,आत्माराम फ़ौजी,रासबिहारी तिवारी,अशोक पटैरिया,विजय अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।


