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January 13, 2026 8:15 am

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100 वर्ष की किताब में जिंदगी की राह जीने की कला देकर अलविदा हुए किताब सिंह

 

 

गुरसरांय (झांसी)। पूरे 100 वर्ष जिंदगी की राह चल कर वास्तव में जिंदगी जीने की कला किताब में लिखकर सबको अपनी किताब देकर 27 अप्रैल रविवार को किताब सिंह ने ली दुनिया से विदाई। बताते चलें पत्रकार शिशुपाल सिंह सरस के पिताजी पूरे 100 वर्ष की उम्र पाने के बाद चलते फिरते एक बेहतरीन जिंदगी जीते हुए और आम लोगों को जिंदगी जीने की कला हमेशा दीन दुखियों की सेवा करना और प्रकृति से हमेशा जुड़े रहना दिखा कर आज उन्होंने अपनी जिंदगी का आखरी पन्ना किताब का पढ़कर गौलोक वासी हो गए यह खबर पूरे गुरसरांय व क्षेत्र में जब हुई तो जगह-जगह शोकसभाएं और श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए लोगों ने 2 मिनट का मौन धारण कर ईश्वर से दिबंगत आत्मा की शांति व शोक संतृप्त परिवार को धैर्य व शक्ति हेतु प्रार्थना की गई। पत्रकारों की सभा में कुंवर रामकुमार सिंह,अशोक सेन, फूल सिंह परिहार,सुनील सिंह चौहान,अखिलेश तिवारी सुट्टा, सुनील कुमार जैन उर्फ डीकू,कौशल किशोर,सार्थक नायक,आशुतोष गोस्वामी,शौकीन खान,संदीप श्रीवास्तव,सोम मिश्रा,हरिश्चंद्र नायक,आयुष त्रिपाठी,विकास अग्रवाल,सुरेश सोनी सरसैड़ा,सुखदेव ब्यास, सरजू शरण पाठक,राजेश अग्रवाल,अरुण चतुर्वेदी, जयप्रकाश बरसैया,संजू सिंह परिहार,मोनू यादव,अंकित सेंगर, सत्य प्रकाश द्विवेदी,नितिन मोदी आदि लोग मौजूद रहे।वही एक शोकसभा में समाजसेवी एडवोकेट सतीश चंद्र चौरसिया,रामनारायण पस्तोर,प्रसिद्ध नारायण सिंह यादव,आत्माराम फौजी आदि ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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